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भाजपा अपने पास रखेगी गृह, विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रालय , 3-3 मंत्रीपद नायडू और नीतीश को

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में लगभग 12 से 15 स्थान एनडीए सहयोगियों को मिल सकते हैं। भाजपा के शीर्ष नेता इस रविवार को मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण से पहले गठबंधन सहयोगियों के साथ चर्चा शुरू कर रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह और राजनाथ सिंह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार शाम को अपने आवास पर सहयोगियों के साथ चर्चा में लगे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, बैठकें एक-पर-एक हो रही थीं। कथित तौर पर पहली बैठक राकांपा के अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और समीर भुजबल के साथ हुई, उसके बाद रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की बैठक हुई।

सूत्रों का कहना है कि भाजपा रायसीना हिल के शीर्ष गृह, विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रालयों के साथ-साथ रेलवे, सड़क परिवहन, कानून, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे कुछ अन्य प्रमुख मंत्रालयों को अपने पास रखना चाहती है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं जेपी नड्डा, अमित शाह और राजनाथ सिंह के एक समूह ने शुक्रवार को जेडीएस, टीडीपी जेडीयू, एनसीपी, एसएस, एलजेपी और एनसीपी के नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। सहयोगी खेमे से मंत्री के तौर पर टीडीपी के राममोहन नायडू, एलजेपी के चिराग पासवान, जेडीयू के लल्लन सिंह, जेडीएस के कुमारस्वामी और अपना दल की अनुप्रिया पटेल के नाम चर्चा में हैं। 

सूत्रों ने कहा है कि टीडीपी और जेडीयू अपने राज्यों (क्रमशः आंध्र प्रदेश और बिहार) के लिए फंड में अधिक रुचि रखते हैं और वित्तीय पैकेज उनकी प्राथमिकता है। टीडीपी, जो 16 सांसदों के साथ एनडीए में सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र है, को मंत्रिपरिषद में कम से कम तीन बर्थ मिल सकती हैं, जिसमें एक कैबिनेट पद और दो राज्य मंत्री शामिल हैं। 2018 में, टीडीपी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन छोड़ने से पहले, नरेंद्र मोदी सरकार में उसके एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री थे। तब टीडीपी के भी 16 सांसद थे, लेकिन इस बार उसका महत्व कहीं ज्यादा है। 

इसी तरह जद-यू तीन पदों, एक पूर्ण कैबिनेट मंत्री पद और दो राज्य मंत्रियों की दौड़ में हो सकता है। जद-यू ने संयोगवश 2019 में चार सीटें मांगी थीं, जब उसने लोकसभा चुनाव में 16 सीटें जीती थीं, लेकिन भाजपा नहीं मानी और जद-यू मंत्रिमंडल से बाहर रही। इस बार जद-यू ने 12 सीटें जीती हैं, लेकिन टीडीपी की तरह इस बार उसका महत्व कहीं अधिक है। कहा जा रहा है कि जद-यू की नजर प्रतिष्ठित रेल मंत्रालय, कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय पर है। नीतीश कुमार पहले केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं जबकि जद-यू के आरसीपी सिंह इस्पात मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं।

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